शनिवार, 24 जून 2017

पीएसएलवी-सी 38((PSLV -C38 )) | 1 उपग्रह और 30 नैनो उपग्रह 14 देश | विस्तृत | उपयोग | विशेषताएं | www.GKinHindi.Net

पीएसएलवी-सी 38((PSLV -C38 )) | 1 उपग्रह और 30  नैनो उपग्रह 14 देश |

 पीएसएलवी-सी 38(PSLV -C38 )

इसरो पीएसएलवी-सी38 योजना के अनुसार पहले लॉन्च पैड से सुबह नौ बजकर 29 मिनट पर उड़ा और कुछ मिनटों बाद इसने उपग्रहों को कक्षा में प्रक्षेपित कर दिया। पीएसएलवी द्वारा लॉन्च कुल भारतीय उपग्रहों की संख्या अब 48 हो गई है।

आने वाले दिनों में उपग्रह अपने पैनक्रोमैटिक (ब्लैक एंड व्हाइट) और मल्टीस्पेक्ट्रल (कलर) कैमरों की मदद से कई तरह की रिमोट सेंसिंग सेवाएं देगा।

पीएसएलवी के साथ गए उपग्रहों में एक नैनो उपग्रह तमिलनाडु स्थित कन्याकुमारी जिले की नूरुल इस्लाम यूनिवसर्टिी द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया। यह एनआईयूसैट फसलों के निरीक्षण और आपदा प्रबंधन के सहयोगी अनुप्रयोगों के लिए तस्वीरें उपलब्ध करवाएगा। दो भारतीय उपग्रहों के अलावा पीएसएलवी के साथ गए 31 नैनो उपग्रह 14 देशों के हैं। ये देश हैं-
ने शुक्रवार को अपने प्रमुख रॉकेट प्रक्षेपण यान पीएसएलवी से 712 किलोग्राम के कार्टोसैट-2 श्रृंखला के एक उपग्रह और 30 नैनो उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया। प्रक्षेपण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया गया। यह पीएसएलवी का लगातार 39वां सफल मिशन था।

पीएसएलवी-सी 38 (PSLV -C38 ) 31 नैनो उपग्रह 14 देशों के हैं। ये देश हैं-

  1. ऑस्ट्रिया (1)
  2. बेल्जियम (3)
  3. चिली (1)
  4. चेक रिपब्लिक (1)
  5. फिनलैंड (1)
  6. फ्रांस (1)
  7. जर्मनी (1)
  8. इटली (3)
  9. जापान (1)  
  10. लातविया (1)
  11. लिथुआनिया (1) 
  12. स्लोवाकिया (1) 
  13. ब्रिटेन (3)
  14. और अमेरिका (10)
आज के सफल प्रक्षेपण के साथ विदेशों से भारत के पीएसएलवी द्वारा कक्षा में स्थापित किए गए ग्राहक उपग्रहों की कुल संख्या 209 पहुंच गई है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने पीएसएलवी-सी38 मिशन में कई ऐसे नवोन्मेष किए हैं, जो उपग्रहों को एक से अधिक कक्षाओं में किफायती ढंग से प्रक्षेपित करने में मदद करेंगे।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक के. सिवान ने कहा कि आज का प्रक्षेपण इसरो के लिए कोई नियमित मिशन नहीं था क्योंकि वैग्यानिकों ने इसमें कई नवोन्मेष किए हैं। उन्होंने कहा, “हमने इस मिशन में कई नवोन्मेष किए हैं। उपग्रह अलग होने के बाद, पीएस4- चौथा ऊपरी चरण- 10 अन्य कक्षाओं के लिए सक्रिय रहेगा और यह बेहद खर्चीले प्रयोगों के लिए एक बहुत अच्छा और किफायती मंच उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयोग पहले ही किए जा चुके हैं और मनचाहे नतीजे प्राप्त किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वहां ऐसे कई अदभुत काम होने वाले हैं।

इसरो के प्रमुख रॉकेट पीएसएलवी (पीएसएलवी-सी38) ने अपनी 40वीं उड़ान में कार्टोसैट-2 श्रृंखला के उपग्रह को प्रक्षेपित किया।यह उपग्रह रक्षा बलों के लिए समर्पति है। इसके अलावा पीएसएलवी अपने साथ 30 नैनो उपग्रह लेकर गया है। कार्टोसैट-2 रिमोट सेंसिंग उपग्रह है।

पीएसएलवी-सी 38 मिशन के निदेशक बी जयकुमार ने कहा कि इसरो ने तीसरी बार पीएस4 (रॉकेट के चौथे चरण) उुपरी चरण को पुन: चालू करके दिखाया है। उन्होंने कहा, “इसके साथ मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि हम उपग्रह दल की जरूरत के मुताबिक उपग्रहों को कई कक्षाओं में स्थापित करने में सफल रहेंगे। यह माह इसरो के लिए ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि 18 दिनों की अवधि में इसने जीएसएलवी मार्क3 और पीएसएलवी-सी38 जैसे दो बड़े प्रक्षेपणों को अंजाम दिया है।

सिवान ने कहा कि इतिहास रचना इसरो की जीवनशैली बन चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछले 50 दिनों में इसरो ने उपग्रहों की विविधता के साथ पीएसएलवी, जीएसएलवी, जीएसएलवी मार्क 3 नामक तीन बड़े मिशन प्रक्षेपित किए हैं। उन्होंने कहा, यह सब कुछ 50 दिन की छोटी सी अवधि में हुआ है।यह सब इसरो की टीम की मेहनत के कारण संभव हुआ। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक कुन्ही कृष्णन ने कहा कि पीएसएलवी-सी38 के सफल प्रक्षेपण ने स्पष्ट तौर पर दिखा दिया कि वह सबसे अधिक विसनीय प्रक्षेपण यानों में से एक है।

पीएसएलवी-सी 38 विशेषताएं :-

  •     एसलवी सी-38 का लॉन्च कामयाब रहा
  •     आसमान से सरहद पर नज़र रखेगा कार्टोसैट
  •     500 किमी ऊंचाई से दुश्मन के टैंकों की गिनती में सक्षम
  •     यह छोटी चीजों पर भी नजर रख सकता है
  •     स्मार्ट सिटी नेटवर्क की योजनाओं में भी मददगार
  •     भारत के पास पहले से ऐसे पांच सैटेलाइट मौजूद है
  •     कार्टोसैट-2 श्रृंखला का उपग्रह रक्षा बलों के लिए समर्पित है
  •     ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पर ले जाए गए इन उपग्रहों का कुल वजन लगभग 955 किलोग्राम है.
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