सोमवार, 5 जून 2017

दुनिया की बर्बादी के खलनायक





प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास में राजाओं, सुल्तानों और बादशाहों की तानाशाही के तमाम सारे उदाहरण मिलते हैं। राजा, महाराजा, सुल्तान या बादशाह स्वेच्छारी हो सकते थे। क्योंकि उनके ऊपर जनतांत्रिक नियंत्रण नहीं था। विश्व के राजनीतिक परिदृश्य में जब लोकतंत्र का आगाज हो रहा था वैसे हालात में तानाशाही शासन की अवधारणा समझ से परे थी। लेकिन सच ये है कि दुनिया ने ऐसे सनकियों का शासन देखा जिससे दुनिया बर्बादी के कगार पर पहुंची। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर ऐसा क्या था जब शासक स्वेच्छाचारी हो गए।

1.
किम जोंग




उत्तर कोरिया का तानाशाह किम जोंग उन जिस तरह से हर काम पर अड़ियल रुख अपनाता है और हर फैसले पर अडिग रहता उससे माना जा रहा है कि वह दुनिया का अगला हिटलर साबित हो सकता है। किम जोंग की सनक और खौफनाक कारनामों के किस्से मशहूर हैं। वह एक ऐसा तानाशाह है जो अपने सगे-संबंधियों पर भी रहम नहीं करता। किसी को मौत देना उसके लिए लिए सबसे छोटा काम है। आइए जानते हैं किम जोंग उन खतरनाक कारनामों के बारे में जिसे सुनते ही दिल में सिहरन उठ जाती है।


फूफा को 120 शिकारी कुत्तों के सामने फेंकवाया

किम जोंग ने साल 2013 में अपने सगे फूफा को बेरहमी से मरवा दिया था। उसने अपने फूफा को खूंखार कुत्तों के सामने डलवा दिया था। 120 शिकारी कुत्तों ने किम के फूफा जेंग सेंग को नोच नोच कर मारडाला था। बताया जाता है कि जिस फूफा को सनकी तानाशाह ने मरवा दिया उसी ने उसे सियासत की बारीकियां सिखाई थीं। लेकिन किम जोंग को लगने लगा था कि फूफा का प्रभाव उससे ज्यादा हो रहा है तो उसने फूफा पर कुछ आरोप लगाकर उसे उसकी हत्या करा दी।

बुआ को दिया जहर


किम जोंग की बुआ ने जब अपने पति की मौत पर सवाल उठाया तो उसे भी जहर दिला दिया गया। इसके बाद बताया गया कि उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। 2015 में कोरिया भागे एक अफसर ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा था कि जोंग ने अपनी बुआ की हत्या करा दी थी।


झपकी लेने में सेना प्रमुख को मरवाया


किम जोंग को फरमान पर आनाकानी पसंद नहीं है, क्योंकि ऐसा करने वाले को सिर्फ सजा--मौत होती है। तानाशाह के बार किम जोंग ने उत्तर कोरिया के रक्षा प्रमुख ह्योंग योंग तोप से उड़वा दिया था। उनकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने किम जोंग की एक मीटिंग में झपकी लेने की हिमाकत कर दी थी।

नहीं रोने पर होती है सजा मौत

कहा जाता है कि किंम जोंग के पिता की जब मौत हुई तो ऐलान किया गया कि अंतिम संस्कार में मौजूद हर किसी को रोना होगा। लेकिन जिन लोगों के मौके पर आंसू नहीं आए उन्होंने उन्हें सजा मौत मिली। शोक नहीं वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया और गोली मार दी गई।


स्कूल में अश्लील साहित्य पढ़ते हुए मिला

कहा जाता है कि किंग जोंग ने स्विटजरलैंड के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बर्न में दूसरे नाम से पढ़ाई की। स्कूल में वह काफी कमजोर छात्र था। उसकी सोहबत ठीक नहीं थी। एक बार वो स्कूल में उसे पोर्न मैगजीन पढ़ते हुए पकड़ा गया था।




सनक में लेता है कोई भी फैसला

किम जोंग उन को सबसे सनकी तानाशाह बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि 2015 में साउथ कोरिया में बार्डर पर लाउडस्पीकर लगाकर अपना प्रोपेगंडा लोगों को सुनाना शुरू किया था। इस पर किम जोंग उन बौखला गया और सीमा पर अपने सैनिक भेज दिया। किम जोंग ने ऐलान किया कि अगर साउथ कोरिया ने लाउड स्पीकर नहीं बंद किए तो उसकी सेना हमला कर देगी। इसके बाद बड़ी मशक्कत से दोनों देशों का विवाद सुलझा था।


खुद को भगवान बताता है तानाशाह

उत्तरी कोरिया का तानाशाह किम जोंग खुद को भगवान के रूप में पेश करता है। वह अपने देश के नागरिकों के बीच ऐसे तथ्य पेश करता है जिसे लोग उसे भगवान मानने लगें।

2.
मुसोलिनी की कहानी और आतंक का राज




 

दुनिया के फलक पर जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर के उभरने से पहले इटली का तानाशाह बेनितो मुसोलिनी अपने देश का सबसे लोकप्रिय नेता था. उसको लोगों ने इतना प्याेर और सम्मा दिया कि उसको ' लीडर' कहा जाने लगा। लेकिन जब उनकी नीतियों से लोगों का मोहभंग हुआ तो विरोधियों ने 1945 में उसको गोलियों से उड़ा दिया। इसके बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ तो लोगों ने इस पर भी उसकी शरीर को चौराहे पर नुमाइश के लिए टांग दिया था।

सबसे कम उम्र में बना पीएम

बेनितो मुसोलिनी (1883-1945) इटली की नेशनल फासिस्टन पार्टी का नेता था। वह 1922-1943 तक देश का प्रधानमंत्री रहा। मुसोलिनी इटली के इतिहास में सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बना। 1925 तक उसने संवैधानिक तरीके से शासन किया। लेकिन उसके बाद उसने लोकतंत्र का गला घोंट दिया और कानूनी रूप से तानाशाही को अपना लिया। वह इटली में फासीवाद का जनक था। तानशाह होने के बाद उसने विरोधियों का अपनी खुफिया पुलिस के जरिये सफाया कर दिया।

जब मुसोलिनी ने जर्मनी का दिया साथ

द्वितीय विश्व युद्ध में मुसोलिनी ने जर्मनी का साथ दिया। लेकिन उसके नेतृत्व पर सवाल भी उठने लगे। इस वजह से इटली के राजा ने उसको बर्खास्त कर दिया और उसको गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन जर्मनी ने उसको जेल से रिहा करा लिया। 1945 में जब यह बिल्कु।ल साफ हो गया कि जर्मनी द्वितीय विश्वय युद्ध हार रहा है तो मुसोलिनी ने स्विट्जरलैंड भागने की कोशिश की लेकिन वो अपनी प्रेमिका के साथ पकड़ा गया. उनकी हत्या कर दी गई। उसके शव मिलान लाया गया। उस दौर के एक अखबार ने दावा किया था कि उनके शव नुमाइश के लिए चौराहे पर टांग दिया गया था। मुसोलिनी विरोधी पार्टीसन गुट के प्रमुख ने तब कहा भी था कि ऐसी घटनाएं तानाशाही के खिलाफ लोगों के गुस्सेग को दर्शाती है और यह गलत नहीं है।

3.
 हिटलर



 

तानाशाही और क्रूरता के बारे में जब कभी हम चर्चा करते हैं तो हिटलर को हम लोग कैसे भूल सकते हैं। किसी खड़ूस व्यक्ति से बहस हो जाए तो वह हमें हिटलर सा लगता है, स्कूल का कोई सख्त टीचर हो या ऑफिस में हर पल आप पर नज़र रखने वाले बॉस हों आप उनको हिटलर कहकर बुलाने में जरा भी गुरेज नहीं करते।

हिटलर की ज़िंदगी से जुड़ी कई दिलचस्प कहानियां हैं। किसी कहानी में वो हीरो की तरह नजर आता है तो किसी में विलेन। लेकिन सच ये है कि एडोल्फ हिटलर 20 वीं सदी का सबसे क्रूर तानाशाह था। प्रथम विश्व युद्ध के बाद 1933 में वह समाजवादी जर्मन वर्कर्स पार्टी को सत्ता में लाने के बाद उसने जर्मन सरकार पर अधिपत्य कर लिया।

एडोल्फ हिटलर का जन्म आस्ट्रिया में 20 अप्रैल 1889 को हुआ। 17 वर्ष की उम्र में पिता के निधन के बाद वो वियना चला गया। पैसों की तंगी के कारण वह पोस्टकार्डों पर चित्र बनाकर काम चलाने लगा। यही वो समय था जब हिटलर के मन में साम्यवादियों और यहूदियों के प्रति घृणा ने जन्म लिया।

हिटलर ने एक विशाल जर्मन साम्राज्य की स्थापना का लक्ष्य जमर्नी की जनता के सामने रखा। उसका मानना था कि ऐसा करने से जर्मन सुख से रह सकेंगे। धीरे-धीरे उसका प्रभाव बढ़ने लगा। उसने स्वास्तिक को अपने दल का चिह्र बनाया जो और भूरे रंग की पोशाक पहने सैनिकों की टुकड़ी तैयार की। 1923 में उसने अपनी आत्मकथा मीन कैम्फ ("मेरा संघर्ष") लिखी। इसमें उसने लिखा कि आर्य जाति सभी जातियों से श्रेष्ठ है और जर्मन आर्य हैं। उन्हें विश्व का नेतृत्व करना चाहिए। यहूदी सदा से संस्कृति में रोड़ा अटकाते आए हैं। जर्मन लोगों को साम्राज्यविस्तार का पूर्ण अधिकार है। फ्रांस और रूस से लड़कर उन्हें जीवित रहने के लिए भूमि प्राप्ति करनी चाहिए।

1930-32
में जर्मनी में बेरोज़गारी बहुत बढ़ गई। संसद में नाजी दल के सदस्यों की संख्या 230 हो गई। 1932 के चुनाव में हिटलर को राष्ट्रपति के चुनाव में सफलता नहीं मिली। जर्मनी की आर्थिक दशा बिगड़ती गई और विजयी देशों ने उसे सैनिक शक्ति बढ़ाने की अनुमति की। 1933 में चांसलर बनते ही हिटलर ने जर्मन संसद को भंग कर दिया, साम्यवादी दल को गैरकानूनी घोषित कर दिया और राष्ट्र को स्वावलंबी बनने के लिए ललकारा।


60
लाख यहूदियों की कराई थी हत्या

1933
में जर्मनी की सत्ता पर जब एडोल्फ हिटलर काबिज हुआ था तो उसने वहां एक नस्लवादी साम्राज्य की स्थापना की थी। वह यहूदियों से सख्त नफरत करता था। यहूदियों के प्रति हिटलर की इस नफरत का नतीजा नरसंहार के रूप में सामने आया। होलोकास्ट इतिहास का वो नरसंहार था, जिसमें छह साल में तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी गई थी। इनमें 15 लाख तो सिर्फ बच्चे थे।


दूसरे विश्वयुद्ध का सबसे बड़ा कारण था हिटलर

द्वितीय विश्व युद्ध तब हुआ, जब हिटलर के आदेश पर नाजी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया। फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था और वादे के अनुसार उन दोनो ने नाज़ी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी। इसके बाद जर्मनी ने रूस पर आक्रमण किया। जब अमेरिका द्वितीय विश्वयुद्ध में सम्मिलित हो गया तो हिटलर की सामरिक स्थिति बिगड़ने लगी।


हर पल सताता था मौत का डर

हिटलर को अपनी मौत का बहुत डर था। ऐसा कहते हैँ कि कहीं उसके खाने में ज़हर मिला दिया गया हो। यही वजह थी कि वह अपने सेवकों के चखने के बाद ही खाना खाता था। उसे ऐसा लगता था कि इंग्लैण्ड उसे मारना चाहता है जिस कारण वह हर वक्त चौंकन्ना रहता था।



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शादी के अगले दिन कर ली थी आत्महत्या

आत्महत्या करने से कुछ घंटों पहले ही उसने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन से शादी की थी। 'हिटलर्स लास्ट डे: मिनट बाई मिनट' क़िताब के मुताबिक, 30 अप्रैल को उसने खुद को गोरी मार ली थी। उस वक्त वह उस बंकर के कांफ्रेंस रूम में था जिसमें वह रहता था। क़िताब के अनुसार, हिटलर दूसरे विश्वयुद्ध में जर्मनी की हार से बहुत दुखी था और इसी कारण वह अवसाद में चला गया था। उसके आत्महत्या करने के तुरंत बाद उसकी बीवी ईवा ब्राउन ने भी जहर खाकर आत्महत्या कर ली थी।

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सद्दाम हुसैन (अनसुनी कहानियां )

 






 'सद्दाम हुसैन, पॉलिटिक्स ऑफ़ रिवेंज' लिखने वाले सैद अबूरिश का मानना है कि सद्दाम की बड़ी-बड़ी इमारतें और मस्जिदें बनाने की वजह तिकरित में बिताया उसका बचपन था, जहां उसके परिवार के लिए उनके लिए एक जूता तक खरीदने के लिए भी पैसे नहीं होते थे। दिलचस्प बात ये है कि सद्दाम अपने जिस भी महल में सोता था। वो सिर्फ कुछ घंटों की ही नींद लेता था। वो अक्सर सुबह तीन बजे तैरने के लिए उठ जाया करता था। इराक जैसे रेगिस्तानी मुल्क में पहले पानी धन और ताक़त का प्रतीक हुआ करता था और आज भी है।


सद्दाम के हर महल में फव्वारों और स्वीमिंग पूल की भरमार रहती थी। कफलिन लिखते हैं कि सद्दाम को स्लिप डिस्क की बीमारी थी। उनके डाक्टरों ने उन्हें सलाह दी थी कि इसका सबसे अच्छा इलाज है कि वो खूब सद्दाम हुसैन के सारे स्वीमिंग पूलों की बहुत बारीकी से देखभाल की जाती थी। उसका तापमान नियंत्रित किया जाता था और ये भी सुनिश्चित किया जाता था कि पानी में जहर तो नहीं मिला दिया गया है।


सद्दाम पर एक और किताब लिखने वाले अमाजिया बरम लिखते हैं कि ये देखते हुए कि सद्दाम के शासन के कई दुश्मनों को थेलियम के ज़हर से मारा गया था, सद्दाम को अंदर ही अंदर इस बात का डर सताता था कि कहीं उन्हें भी कोई जहर दे कर मार दे। हफ्ते में दो बार उनके बग़दाद के महल में ताज़ी मछली, केकड़े, झींगे और बकरे और मुर्गे के गोश्त की खेप भिजवाई जाती थी। राष्ट्पति के महल में जाने से पहले परमाणु वैज्ञानिक उनका परीक्षण कर इस बात की जांच करते थे कि कहीं इनमें रेडियेशन या जहर तो नहीं है।



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