शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2016

एडोल्फ़ हिटलर (हिटलर),हिटलर का जीवन परिचय,हिटलर की आत्मकथा


       एडोल्फ़ हिटलर (हिटलर)
                          
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                  हिटलर का जीवन परिचय

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पूरा नाम    –    अडोल्फ़ हिटलर
जन्म    –    20 अप्रैल, 1889
जन्म स्थान   –   ऑस्ट्रिया
 माता   –    क्लारा हिटलर
 विवाह   –    ईवा ब्राउन के साथ


अडोल्फ हिटलर का जन्म 20 अप्रैल 1889 को Braunau am Inn, आस्ट्रिया में हुआ था। जब हिटलर 3 साल का था, तब परिवार ऑस्ट्रिया से जर्मनी गया था.
हिटलर अपने पिता के साथ अक्सर भिड़ गए. कला के अलावा, हिटलर जर्मन राष्ट्रवाद में एक शुरुआती रुचि दिखाई

अडोल्फ हिटलर एक प्रसिद्ध जर्मन राजनेता एवं तानाशाह थे। वे "राष्ट्रीय समाजवादी जर्मन कामगार पार्टी" (NSDAP) के नेता थे। इस पार्टी को प्राय: "नाजी पार्टी" के नाम से जाना जाता है। सन् १९३३ से सन् १९४५ तक वह जर्मनी का शासक रहे।

प्रथम विश्व युद्ध के फैलने पर, एडॉल्फ हिटलर जर्मन सेना में सेवा करने के लिए आवेदन किया. उसने आयरन क्रॉस प्रथम श्रेणी में और ब्लैक वुंड पदक प्राप्त कर के, वीरता के लिए सम्मानित किया गया. एडॉल्फ हिटलर की युद्ध के प्रयासों के पतन से अधिक कड़वा हो गया.

प्रथम विश्व युद्ध के बाद, हिटलर मनिच में लौटे और एक खुफिया अधिकारी के रूप में सेना के लिए काम करना जारी रखा. हिटलर की कटु बीयर हॉल भाषणों के नियमित रूप से दर्शकों को आकर्षित करने के लिए शुरू किया.
1938 में हिटलर ने, कई अन्य यूरोपीय नेताओं के साथ, म्यूनिख समझौते पर हस्ताक्षर किए. 29 अप्रैल 1945 को, एडॉल्फ हिटलर ने अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन से शादी कर ली.

दुश्मन के सैनिकों के हाथों में पड़ने के डर से हिटलर और ब्राउन ने 30 अप्रैल 1945 को, उनकी शादी के बाद आत्महत्या कर ली. उनके शरीर जला दिया गया. बगीचे के पीछे जहां रैह दफ़्तर, बमबारी से किया गया. हिटलर की हार यूरोपीय जर्मनी का प्रभुत्व इतिहास अंत हो गया और फासीवाद की हार के एक चरण का अंत हो गया. एक नई वैचारिक विश्व संघर्ष, शीत युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उभरा है.
हिटलर को द्वितीय विश्वयुद्ध के लिये सर्वाधिक जिम्मेदार माना जाता है। द्वीतिय विश्व युद्ध तब हुआ जब उनके आदेश पर नात्सी सेना ने पोलैंड पर आक्रमण किया। फ्रांस और ब्रिटेन ने पोलैंड को सुरक्षा देने का वादा किया था और वादे के अनुसार उन दोनो ने नाज़ी जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी।


हिटलर और यहूदी 

अडोल् हिटलर उन चर्चित लोगों में से एक है, जिन्हें लाखों-करोड़ों यहूदियों की मौत का दोषी बताया गया था।

हिटलर बीसवीं सदी के सर्वाधिक चर्चित या फिर कहें सर्वाधिक घृणित व्यक्तियों में से एक हैं। हिटलर के बारे में जितना भी पढ़ो कम ही लगता है। हिटलर के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी तो हर किसी को होगी लेकिन उनके बारे में कुछ ऐसी बातें भी हैं, जो आपको चौंका देगी। जी हां, हिटलर को आप एक प्रसिद्ध राजनेता एवं तानाशाह के रूप में जानते हैं, मगर वह सब स्कूल में पढ़ाई गई इतिहास कि कक्षा में था। पर यहां हम आपको हिटलर के बारे में कुछ ऐसी हैरत करने वाली बातें बताएंगे जिसे ना तो आपने किसी हिस्ट्री की किताब में पढ़ी होगी और ना ही कभी किसी से सुनी होगी।
 तो आइये जानते हैं हिटलर के बारे में जाने चौंकाने वाला खुलासा-

हिटलर के बारे में कुछ रोचक तथ्य

अगर संसार के सबसे विनाशकारी पुरूषों की बात की जाए तो जुबान पे सबसे पहला नाम हिटलर का ही आता है. हिटलर को दुसरे विश्व युद्ध के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है. यह हिटलर ही था जिसके कारण इतनी जाने गई, घर बर्बाद हुए. आइए इस विनाशकारी पुरूष के बारे में कुछ रोचक तथ्य जानते हैं.


1. ‘Adolf’ नाम का मतलब है खास भेड़ीया.
हिटलर के पिता का असली नाम Alois Schiklgruber था. मगर हिटलर के जन्म के 13 साल बाद उन्होंने अपना नाम बदल कर Alois Hitler रख लिया. यह अभी भी अस्पष्ट है कि इन के पिता ने अपना नाम क्यों बदला.  

2. यहूदियों पर इतना अत्याचार करने के बाद हिटलर का पहला प्यार एक यहूदी लड़की ही थी। मगर हिटलर के पास उस समय इतनी भी हिम्मत नहीं थी कि वह उस लड़की से अपने प्यार का इजहार कर सकता।
 
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 3. हिटलर की जिंदगी का वह दिन सबसे खुशी भरा था जब, सन 1938 में टाइम् मैगजीन ने हिटलर को "दा मैन ऑफ दा ईयर" का टाइटल दिया था।

4. आधुनिक इतिहास में पहली बार हिटलर वह पहला इंसान था जिसने धूम्रपान विरोधी अभियान का आगाज किया।

5. हिटलर पेट फूलने की समस्या से ग्रस्त था। इसके लिए वह 28 तरीके की दवाइयां लेता था। इतना ही नहीं, वह 80 तरह की नशीली दवाओं (ड्रग्स) का लती भी था। इनमें, चूहे मारने वाली दवाई और मॉर्फिन हिटलर को अत्यधिक पसंद थी।

6. हिटलर ने भले ही कितने लोगों के खून बहाए हों, लेकिन वह शुद्ध रूप से शाकाहारी था। इतना ही नहीं, उसने पशु क्रूरता के खिलाफ एक कानून भी बनाया था। 


7. सोलह वर्ष की अवस्था में हिटलर स्कूली शिक्षा छोड़ दी, सन 19०८ से 1913 तक ये पोस्टकार्ड पर चित्र बनाकर अपना निर्वाह करते रहे. प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ने पर हिटलर सेना में भर्ती हो गये. उन्हें दो बारआयरन क्रास से सम्मानित किया गया.



8. King kong हिटलर की पसंदीदा फिलम थी.
9. हिटलर जिस भी पार्टी में जाते थे तो वहां अपना भाषण देने लग जाते थे जिससे लोग बहुत ही ज्यादा बोर होते थे. उनके भाषण इतने लंम्बे और बोर होते थे कि कुर्सी पर बैठे कई लोग तो सो ही जाते थे.

10. हिटलर के पिता ने तीन बार शादी की थी. पहली बार अपने से बहुत ज्यादा उम्र की औरत से शादी की थी . दुसरी बार अपनी बेटीयों की उम्र की औरत से शादी की थी. और अंत में तीसरी बार हिटलर की मां से शादी की थी.

11. हिटलर की मां 1908 में हस्पताल में दाखिल थी और एक दिन कैंसर से उनकी मौत हो गई . उनकी देख-रेख करने वाले डाक्टर का कहना था कि उन्होंने अपने 50 साल के करियर में कभी किसी लड़के को अपनी मां की मौत पर हिटलर की तरह इतना रौते हुए नही देखा था .

12. पहले तो हिटलर एक आम सैनिक ही थे. मगर उन्हें कई खिताब और सम्मान तब मिले जब वह प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की तरफ से सारे युद्ध लड़कर जिन्दा वापिस लौटे.

13. हिटलर की जाती नीति के कारण लगभग 1करोड़ 10 लाख लोगो की मौत हुई थी. दुसरे विश्व युद्ध के कारण लगभग 6 करोड़ लोगो ने अपनी जान गवाई थी.

14. हिटलर प्रथम विश्व युद्ध में एक ग्रेनेड की किरच बजने से बुरी तरह से घायल हो गए थे.

15. हिटलर अपने 6 भहिन-भाईयों में चौथा भाई था. उसकी एक भहिन को छोड़कर उसके सब भहिन-भाई किसी किसी वजह से मारे गए.

16. हिटलर का सपना एक पेंटर बनने का था . मगर उसे 1907 और 1908 में दो बार Accdemy of fine arts ने reject कर दिया था.

17. हिटलर अपनी मां की मौत और Art school से दुसरे rejection के बाद बेघर हो गया थे.  

18. हिटलर को चॉकलेट बहुत पसंद थी और वह एक दिन में कम से कम एक किलो चॉकलेट जरूर खा जाता थे.
19. हाल ही अहमदाबाद में एक कपडों की दुकान खुली है जिसका नाम ‘Hitler’ रखा गया है. Hitler की ‘i’ की बिन्दी की जगह स्वासतिक का चिन्ह् डाला गया है.

20. 1936 में जब जर्मनी में ओलंपिक हुए थे तब भारत का मुकाबला जर्मनी से हुआ जिसमें हॉकी के जादुगर मेजर ध्यानचंद की वजह से भारत ने जर्मनी को 8-1 से पटखनी दी थी. इस मैच को हिटलर भी देख रहा था और उसने मेजर ध्यानचंद के खेल से प्रभावित होकर उन्हें अपनी सेना में उच्च पद देने ओर जर्मनी की तरफ से खेलने की पेशकश दी. मगर देशभक्त मेजर ध्यानचंद ने यह पेशकश मुसकराते हुए ठुकरा दी.

21. हिटलर ने इंग्लैंड के राष्ट्रपति और एक महान लेखक सर विंस्टल चर्चिल को विस्फोटक चॉकलेट से मारने की साजिस रची थी. हिटलर के बम बनाने वालों ने विस्फोटक पदार्थो को चॉकलेट की एक पतली परत से ढक दिया और उसे एक काले और सुनहरी कागज़ से ढ़क दिया. मगर इंग्लैंड की खुफीयां एजेंसी ने इसे नाकाम कर दिया.

22. हिटलर की मूंछो कोटुथब्रश मुछें कहा जाता है.

23. एक लंम्बे अरसे तक यह माना जाता रहा कि हिटलर के घर से जो खोपड़ी प्राप्त हुई थी वह हिटलर की थी. मगर 2009 में हुए D.N.A टैस्ट के बाद पता चला है कि यह खोपड़ी हिटलर की नही बल्कि 40 मे कम उम्र की किसी औरत की है.
 
24.  आम तौर पर यह माना जाता है कि हिटलर ने मित्र देशों की सेना के बर्लिन पहुँचने पर अपनी पत्नी ईवा के साथ एक भूमिगत बंकर में आत्महत्या कर ली थी. मगर जेराई विलियम्स और उनके सह-लेखक सिमोन डेस्टन ने अपनी किताब ‘Grey wolf-Escape of Adolf Hitler’ में यह दावा किया है कि दरअसल हिटलर 1945 में बर्लिन स्तिथ भूमिगत बंकर में नही मरा था बल्कि अमरीका से हुए एक गुप्त समझौते के तहत ईवा ब्राउन के साथ दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेटीना चला गया था. जहा वह 1962 में अपनी मृत्यु तक रहा



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               हिटलर की आत्मकथा
सन 1919 में हिटलर ने जर्मन वर्कर्स पार्टी की सदस्यता ग्रहण की. फिर इस पार्टी को उन्होंने नेशनल सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी (नाजी) के रूप में नया नाम दिया. दूरदर्शिता, कड़ी मेहनत,और लगन के कारण हिटलर ने सन 1932 में नाजी पार्टी को जर्मनी के सबसे बड़ा राजनितिक दल बना दिया और सन 1933 में ये इस नाजी पार्टी के सर्वेसर्वा और तानाशाह बन बैठे.
युध्द के मैदान में हिटलर ने सन 1936 में राइनलैड को पुन: प्राप्त किया. सन 1938 में आस्ट्रिया तथा सन 1939 में चेकोस्लोवाकिया के कुछ भाग को भी इन्होंने जीता.


सितंबर 1938 में पौलैंड पर हमला कर हिटलर ने द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुवात की. प्रारंभ में तो इन्हें सफलता मिलती रही, लेकिन सन 1941 में जब उन्होंने रूस पर हमला किया तो उन्हें मुहं की खानी पड़ी.
सन 1931 से 1941 तक के 10 वर्षों में उन्होंने शायद ही कोई राजनितिक भूल की और नेपोलियन द्वारा जीते गये युरोप से बड़ा क्षेत्र अपने अधिकारी में कर लिया.
सन 1944 में हिटलर पर कातिलाना हमला हुआ, वो बच तो गये, पर बहुत बीमार पड गये और विक्षिप्त से हो गये, 30 अप्रैल, 1945 को हिटलर ने आत्महत्या कर ली.


विलक्षण राजकीय प्रतिभा के धनी और तानाशाह एडोल्फ हिटलर को 20 वीं सदी का सर्वाधिक विवादास्पद व्यक्तित्व माना जा सकता है.
     

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एक समय पूरी दुनिया में अपना खौफ पैदा करने वाला जर्मनी का तानाशाह हिटलर खुद भी हमेशा मौत के डर के साये में रहता था। इसीलिये उसने अपने खाने में जहर दिये जाने की आशंका के कारण फूड टेस्टरों को नियुक्त किया था। ये फूड टेस्टर अपनी मर्जी के बिना हिटलर का खाना चखने के लिये मजबूर थे और उन्हें अपने हर निवाले में मौत नजर आती थी।  हिटलर के खाने को टेस्ट करने के लिये नियुक्त की गयी मार्गटवोक भी अन्य 14 लड़कियों के साथ हमेशा इसी दहशत में रहती थी कि पता नहीं किस निवाले पर उनकी मौत लिखी होगी। 

 मार्गट अब 96 साल की हैं और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जिंदगी के भयानक उतार चढ़ाव देखने के कई साल बाद पहली बार हिटलर के फूड टेस्टर के रूप में बिताये गये अपने ढाई साल की कहानी बयान की है। 

 मार्गट ने कहा कि हिटलर शाकाहारी था, इसीलिये जो खाना चखना होता था वह शाकाहारी ही होता था। उन ढाई साल के दौरान हम 14 लडकियां एक से एक लजीज खाना खाती थीं, लेकिन साथ ही हमें बहुत डर लगता था कि पता नहीं इस बार अगर खाने में जहर मिला हो, तो हमारा मरना तय है। हम सभी 14 लड़कियां 20 साल के आस पास उम्र की थीं।           

मार्गरट ने कहा कि मुझे हर दिन सुबह 11 से 12 बजे के बीच खाने की प्लेट दी जाती थी। यह बहुत अच्छा खाना होता था। खाने में एक से एक स्वादिष्ट फल, बंदगोभी, व्हाइट एस्पेरेगस और पिपर्स रहते थे। यह बहुत ही लजीज खाना होता था। 
 मार्गट ने बताया कि जब फूड टेस्टर खाना चखकर बीमार नहीं पडती थी, तब सभी खाने अलग अलग डिब्बों में पैक करके उसे मौजूदा उत्तरी पूर्व पोलैंड में स्थित जर्मन सेना के मुख्यालय वोल्फ लेयर में रह रहे हिटलर के लिये ले जाया जाता था।
उन्होंने कहा कि हम सब हमेशा इस डर में रहते थे कि खाने में जहर मिलाया गया हो, क्योंकि इंग्लैंड हिटलर को जहर देना चाहता था और हिटलर को अपने जासूसों से इस बात का पता चल गया था कि उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया जा सकता है, इसीलिये उसने युवा लड़कियों को अपना खाना चखने के लिये नियुक्त किया।       


मार्गट ने बताया कि जब मित्र राष्ट्रों ने बर्लिन में बमबारी शरू कर दी, तब उसे अपना अपार्टमेंट और सेक्रेटरी की नौकरी छोड़नी पड़ी और उसने अपने सास ससुर के गांव ग्रासप्रास में शरण ली।

यह गांव उस समय पूर्व जर्मनी में था, जो अब पोलैंड का हिस्सा है। मार्गट ने बताया कि जहां उसने शरण ली थी, दुर्भाग्य से वहां का मेयर बहुत बडा नाजी समर्थक था और उसके ताल्लुक एसएस से भी थे। उसी मेयर ने मार्गट को इस काम में लगाया था और मार्गट ने पैसे के अभाव में इस काम को स्वीकार कर लिया।
उन्होंने बताया कि अपने काम के ढाई साल के दौरान उन्होंने कभी भी हिटलर को नहीं देखा। हालांकि उन्हें हिटलर का कुत्ता दिखा था, जब हिटलर पर 20 जुलाई 1944 को प्राणघातक हमला किया गया, तो उस वकत मार्गट सैनिकों के साथ एक तंबू में फिल्म देख रही थीं।             

उस हमले को याद करती हुई मार्गट ने बताया कि हम तंबू में थे और अचानक हमने तेज धमाके की आवाज सुनी और लकडी की बेंच से गिर गये। कोई अचानक चिल्लाया कि हिटलर मारा गया, लेकिन बाद में हमें पता चला कि इस हमले में उसका हाथ जख्मी हुआ है।
 
मार्गट ने कहा कि उस हमले के बाद उन्हें विशेष निरीक्षण में रखा जाने लगा और एक कैदी की तरह वह टेलीफोन नहीं कर सकती थी और उन्हें अपने सास ससुर से मिलने के लिये एसएस के अधिकारियों की निगरानी में जाना होता था।
लेकिन जब हिटलर ने अप्रैल 1945 में आत्महत्या कर ली, तो मार्गट भागकर वापस बर्लिन लौट आयी और छुपकर रहने लगीं। उस समय सोवियत संघ की सेना तेजी से बर्लिन की ओर बढ़ रही थी और उन्होंने मार्गट को हवाई हमले से बचने के लिये बनाये गये ठिकाने से रूसी सैनिकों ने बाहर निकाला और लगभग 15 दिन तक उनके साथ दुष्कर्म किया।          

मार्गट ने बताया कि उन्हें जिंदगी की नारकीय यातना भोगनी पडी और हिटलर का खाना चखने वाली अन्य लडकियां सच में मौत की शिकार हो गयीं। युद्ध में वे सभी मारी गयीं।            

युद्ध खत्म होने पर मार्गट पेंशन कार्यालय में काम करने लगीं और तब पहली बार जिंदगी ने उनके साथ कुछ अच्छा किया। एक दिन काम करते समय मार्गट ने अपने कार्यालय में अपने पति को देखा। उनके पति को रूसी सैनिकों ने कैद कर लिया था और उन्हें सबसे मृत मान लिया था, लेकिन दो साल मार्गट पति के साथ अपने उसी घर में रहने लगीं जहां वह युद्ध शरू होने के पहले रहती थीं।





                    हिटलर की मौत

जर्मनी के नाजी तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की मौत पर हमेशा से ही विवाद रहा है। आमतौर पर धारणा है कि हिटलर ने 1945 में मित्र देशों की सेना के बर्लिन पहुंचने पर अपनी प्रेमिका ईवा ब्राउन सहित एक भूमिगत बंकर में आत्महत्या ली थी। 

इतिहासकारों के मुताबिक हिटलर के शव की शिनाख्त नहीं की गई थी क्योंकि कुछ रूसी सैनिकों ने उनके शवों को जला दिया था। तभी से हिटलर की मौत पर रहस्य गहराया हुआ है। इस मामले पर पक्ष-विपक्ष में कई दावे किए जाते रहे हैं। 

 हाल ही में एक किताब में भी दावा किया गया है कि दरअसल हिटलर 1945 में बर्लिन स्थित भूमिगत बंकर में मरा नहीं था बल्कि अमेरिका से हुए एक गुप्त समझौते के तहत ईवा ब्राउन को लेकर दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना चला गया था

जहां वह 1962 में अपनी मृत्यु तक रहा था।इस किताब के लेखक जेरार्ड विलियम्स का कहना है कि अबतक हिटलर और ईवा ब्राउन की मौत के कोई भी फोरेंसिक सबूत नहीं मिले हैं। 

 इसके अलावा अर्जेंटीना में इन दोनों के होने के बारे में कई प्रत्यक्षदर्शियों की कहानियां भी इस बात की गवाही देती हैं।


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'ग्रे वुल्फ: एस्केप ऑफ एडॉल्फ हिटलर' नामक किताब में अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि नाजी युद्ध प्रौद्योगिकी तक पहुँच के लिए बदले में उन्होंने एडॉल्फ हिटलर को पलायन करने की अनुमति दे दी।

लेखक का दावा है कि इस बात के कई अकाट्य सबूत हैं कि जर्मनी के नाजी नेता और उसकी प्रेमिका को चुपके से एक दक्षिण अमेरिकी देश ले जाया गया था।  

लेखक के मुताबिक हिटलर और ईवा की दो बेटियां भी हुई और 1962 में अर्जेंटिना में ही हिटलर की मौत हुई।
इस पुस्तक में यह भी दावा किया गया है कि रूस के पास जो हिटलर की खोपड़ी के टुकड़े हैं वे वास्तव में एक औरत की खोपड़ी के हैं। विलियम्स और सह-लेखक सिमोन डंस्टन ने हजारों गुप्त दस्तावेजों तथा फोरेंसिक परीक्षण रिपोर्ट के अध्ययन के बाद यह किताब लिखी है।

कुछ का कहना है कि हिटलर ने ज़हर खाया था तो कुछ कहते है  कि उसने खुद को गोली मार दी थी ,हालाकि कुछ का यह मानना है कि यह सब सोवियत सेना की फैलाई गई कहानी है ,

जिस बंकर में हिटलर छुपा हुआ था उसे सेना ने आग के हवाले कर दिया था, बाद में उसे दफनाया गया लेकिन हिटलर की मौत की पुष्टि के लिए सेना ने उसे फिर से कब्र से निकला  I
 
ऐसा एक बार नहीं दर्जनों बार हुआ बाद में बिना सिर और जीभ के दफना दिया गया 

उसके आतंक से दुखी लोगो का दावा था कि बार-बार कब्र से निकालने और दफ़नाने की वजह उसके बुरे कर्म है और ईश्वर उसे मौत के बाद लगातार सजा दे रहे है I
 
हालाकि इसके बाद भी हिटलर की मौत की गुत्थी अब तक सुलझ नहीं पाई है
              

               हिटलर के अनमोल विचार


1.
विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था।


2. महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।


3. कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये, कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है।


4. कोई इंसान बिना किसी कठिनाई के जीतता है तो यह केवल एक विजय है; लेकिन यदि कोई इंसान बहुत सी कठिनाइयों के बावजूद जीतता है तो यह इतिहास है।


5. यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा।


6. शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है।




7. लोगों का बड़ा समूह छोटे झूठ की अपेक्षा बड़े झूठ का आसानी से शिकार बन जाता है।


8. मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता।



9. नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है।



10. सत्य नहीं है जो मायने रखता है, बल्कि वो जीत है।




11. कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शासन करते हैं वे सोचते नहीं।



12. शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं।



13. हमेशा ही विश्वास के खिलाफ लड़ना ज्ञान के खिलाफ लड़ने से अधिक कठिन होता है।



14. जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए।



15. चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा।



16. केवल वही, जो युवाओं का मालिक होता है, भविष्य में लाभ उठता है।



17. सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं। वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं, जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं।



18. जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं।



19. मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है।



 20. सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें।



21. एक ईसाई होने के नाते मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है।



22. जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए। मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है, मुझे क्रांतिकारी चाहियें।



23. व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं।



24. व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है।



25. संघर्ष सभी चीजों का जनक है। जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता नहीं है बल्कि वो सिर्फ क्रूर संघर्ष के माध्यम से जिंदा रह पाता है।



26. कोई भी गठबंधन जिसका उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं है वो मूर्खतापूर्ण और बेकार है।



27. सफलता ही सही और गलत का एकमात्र सांसारिक निर्णायक है।



28. अधिनायकवादी राज्य की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जो लोग उसका अनुसरण करने से डरते हैं वो उस पर बल प्रयोग करता है।



29. कौन कहता है कि मैं भगवान् की विशेष सुरक्षा के अंतर्गत नहीं हूँ ?



30. मानवजाति शाश्वत संघर्ष से शक्तिशाली हुई है और ये सिर्फ अनंत शांति के माध्यम से नष्ट होगी।


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31. आश्चर्य, भय, तोड़-फोड़, हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो। यह भविष्य का युद्ध है।



32. यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है।



33. मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ।




34. अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा।



35. नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़ पाए।



36. किसी देश का नाश केवल जूनून के तूफ़ान से रोका जा सकता है, लेकिन केवल वो जो खुद जुनूनी होते हैं दूसरों में जूनून पैदा कर सकते हैं।



37. जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है।



38. जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है।



39. किसी देश को जितने के लिए सबसे पहले उसके नागरिकों को काबू में करो।



40. पहले वो आपको इग्नोर करेंगे, फिर वो आप  हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे, तब आप जीतोगे।



41. यदि आप जीतते है तो आप को कुछ भी एक्सप्लेन करने की जरूरत नहीं होती है लेकिन यदि आप हार जाते है तो आपको वहां एक्सप्लेन करने के लिए नहीं होना चाहिए।



42. मैं केवल उस चीज़ के लिए लड़ सकता हूँ जिसे मैं प्यार करता हूँ, उसे प्यार करता हूँ जिसे मैं आदर देता हूँ,  और उसे आदर देता हूँ जो मैं जानता हूँ।



43. मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है।


44. कोई भी निर्णय लेने के पहले हज़ारों बार सोचो पर एक बार निर्णय लेने के बाद कभी उसे मत पलटो चाहे इसके लिए आपको हज़ारों तकलीफे उठानी पड़े।



45. विजेता से कभी नहीं पूछा जायेगा कि क्या उसने सच कहा था .



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46. सभी महान आन्दोलन लोक्रप्रिय आन्दोलन होते हैं।  वे मानवीय जूनून और भावनाओं का विस्फोट होते हैं , जो कि विनाश की देवी या  लोगों के बीच बोले गए शब्दों की मशाल के द्वारा क्रियान्वित किये जाते हैं .



47. सभी प्रचार लोकप्रिय होने चाहिए और इन्हें  जिन तक पहुचाना है उनमे से सबसे कम बुद्धिमान व्यक्ति के भी समझ में आने चाहियें .


48. कोई भी गठबंधन जिसका उद्देश्य युद्ध शुरू करना नहीं है वो  मूर्खतापूर्ण और बेकार है .



49. जो कोई भी आकाश को हरा और मैदान को नीला देखता या पेंट करता है उसे मार देना चाहिए .

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50. व्यापक जनसँख्या किसी और ताकत से अधिक भाषण की अपील के प्रति संवेदनशील होती है .


51. व्यक्तिगत ख़ुशी के दिन बीत चुके हैं .



52. अधिनायकवादी राज्य की सबसे बड़ी शक्ति यह है कि जो लोग उसका अनुसरण करने से डरते हैं वो उस पर बल प्रयोग करता है .


53.सफलता की सबसे पहली आवश्यकता हिंसा का नियमित और निरंतर नियोजन है .


54. जो जीना चाहते हैं उन्हें लड़ने दो और जो अनंत संघर्ष वाली इस दुनिया में नहीं लड़ना चाहते हैं उन्हें जीने का अधिकार नहीं है .

55. एक ईसाई होने के नाते  मुझे खुद को ठगे जाने से बचाने का कोई कर्तव्य नहीं है , लेकिन सत्य और न्याय के लिए लड़ने का मेरा कर्तव्य है .



56. कुशल और निरंतर प्रचार के ज़रिये , कोई लोगों को स्वर्ग भी नर्क की तरह दिखाया जा  सकता है या एक बिलकुल मनहूस जीवन को स्वर्ग की तरह दिखाया जा  सकता है .


57. आश्चर्य , भय , तोड़-फोड़ , हत्या के ज़रिये दुश्मन को अन्दर से हतोत्साहित कर दो .यह भविष्य का युद्ध है .



58. जनरलस सोचते हैं कि युद्ध मध्य युग की खेल-कूद प्रतियोगिताएं की तरह छेड़े जाने चाहिए . मुझे शूरवीरों का कोई काम नहीं है ; मुझे क्रांतिकारी चाहियें .


59. जर्मनी या तो एक विश्व-शक्ति होगा या फिर होगा ही नहीं .


60. महान असत्यवादी महान जादूगर भी होते हैं।


61. नफ़रत नापसंदगी की तुलना में अधिक स्थायी होती है .


62. केवल वही , जो युवाओं का मालिक होता है , भविष्य में लाभ उठता है .


63. कितना भाग्यापूर्ण है उन सरकारों के लिए कि जिन लोगों पर वो शाशन करते हैं वे सोचते नहीं .


64. मानवतावाद मूर्खता और कायरता की अभिव्यक्ति है.



65. मेरा मानना ​​है कि आज मेरा आचरण सर्वशक्तिमान निर्माता की इच्छा के अनुसार है.


66. मुझे ये नहीं समझ आता कि इंसान प्रकृति के जितना ही क्रूर क्यों नहीं हो सकता .



67. मैं ज्यादातर लोगों के लिए भावना का प्रयोग करता हूँ और कुछ के लिए कारण बचा कर रखता हूँ .


69. अगर आज मैं यहाँ एक क्रांतिकारी के रूप में खड़ा होता हूँ तो यह क्रांति के खिलाफ एक क्रांतिकारी के खड़े होने के सामान होगा


70. यदि आप एक बड़ा झूठ बोलते हैं और उसे अक्सर बोलते हैं तो उस पर यकीन कर लिया जायेगा .


71. वो सत्य नहीं है जो मायने रखता है , बल्कि वो जीत है .


72. मानवजाति शाश्वत संघर्ष  से शक्तिशाली हुई है और ये सिर्फ अनंत शांति के माध्यम से नष्ट होगी .


73. चुनाव के माध्यम से एक महान व्यक्ति खोजने से पहले एक ऊंट सुई की आंख से निकल जायेगा .


74. शक्ति बचाव में नहीं आक्रमण में निहित है .


75. संघर्ष सभी चीजों का जनक है . जानवरों की दुनिया में इंसान मानवता के सिद्धांत से जीता या खुद को बचाता नहीं है बल्कि वो सिर्फ क्रूर संघर्ष के माध्यम से जिंदा रह पाता है .


76. सफलता ही सही और गलत का एकमात्र सांसारिक निर्णायक है.


77. नेतृत्व की कलाएक एकल दुश्मन के खिलाफ लोगों का ध्यान संगठित करने और यह सावधानी बरतने में है कि कुछ भी इस ध्यान को तोड़  पाए .




78. यूनीवर्सल एजुकेशन सबसे अधिक नुक्सान पहुंचाने वाला ज़हर है जिसका उदारवाद ने अपने विनाश के लिए आविष्कार किया है .



79. कौन कहता है कि मैं भगवान् की विशेष सुरक्षा के अंतर्गत नहीं हूँ ?


80. जो कोई भी यूरोप में युद्ध की मशाल जलाता है वो कुछ और नहीं बस अराजकता की कामना कर सकता है .


81. शब्द अज्ञात क्षेत्रों में पुल का निर्माण करते हैं .
hitler



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