सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

कल्पना चावला(kalpna chawla) :जीवनी(Biography),प्रारंभिक जीवन,शिक्षा,उपलब्धियाँ,अंतरिक्ष यात्री,एक बड़ा राज|





Kalpana Chawla: The first Indian woman in Space

स्थिति:      दिवंगत
कल्पना चावला :जीवनी,अंतरिक्ष यात्री, भारत की बेटी

जन्म:       17 मार्च 1962

जन्मस्थान:    करनाल, हरियाणा, भारत (उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी)

मृत्यु:       1 फ़रवरी 2003 (आयु 41 वर्ष)

जीवनसाथी:     जीन-पियेर हैरिसन (विवा. 1983–2003)

पुरस्कार:          काँग्रेशनल अंतरिक्ष पदक के सम्मान,    
            नासा विशिष्ट सेवा पदक, नासा अंतरिक्ष उड़ान पदक


पिछ्ला व्यवसाय:  शोध वैज्यानिक

अंतरिक्ष में बीता समय:   31दिन, 14घं 54 मि

चयन:             1994  (नासा समूह)

मिशन       एसटीएस-87, एसटीएस-107मिशन



कल्पना चावला :जीवनी,अंतरिक्ष यात्री, भारत की बेटी


कल्पना चावला (17 मार्च 1962 - 1 फ़रवरी 2003), एक भारतीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष शटल मिशन विशेषज्ञ थी ,और अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी।

 वे कोलंबिया अन्तरिक्ष यान आपदा में मारे गए सात यात्री दल सदस्यों में से एक थीं।


भारत की बेटी-कल्पना चावला


कल्पना चावला करनाल, हरियाणा, भारत में एक हिंदू भारतीय परिवार में पैदा हुई थीं। उनका जन्म 17 मार्च 1962 मे हुआ था। उनके पिता का नाम श्री बनारसी लाल चावला और माता का नाम संजयोती था। वह अपने परिवार के चार भाई बहनो मे सबसे छोटी थी।
कल्पना ने फ्रांस के जान पियर से शादी की जो एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर थे.

कल्पना अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थी (उन्होंने अमेरिका की नागरिकता ले ली थी)


घर मे सब उसे प्यार से मोंटू कहते थे।




कल्पना की प्रारंभिक पढाई लिखाईटैगोर बाल निकेतनमे हुई। कलपना जब आठवी कक्षा मे पहुची तो उसने इंजिनयर बनने की इच्छा प्रकट की। उनकी माँ ने अपनी बेटी की भावनाओ को समझा और आगे बढने मे मदद की। पिता उसे चिकित्सक या शिक्षिका बनाना चाहते थे। किंतु कल्पना बचपन से ही अंतरिक्ष में घूमने की कल्पना करती थी।


कल्पना का सर्वाधिक महत्वपूर्ण गुण था - उनकी लगन और जुझार प्रवृति। कलपना तो काम करने मे आलसी थी और असफलता मे घबराने वाली थी। उनकी उड़ान में दिलचस्पी जहाँगीर रतनजी दादाभाई टाटा, से प्रेरित थी जो एक अग्रणी भारतीय विमान चालक और उद्योगपति थे।

 (एम्स अनुसंधान केंद्र)


1988 के अंत में उन्होंने नासा के एम्स अनुसंधान केंद्र के लिए ओवेर्सेट मेथड्स इंक के उपाध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया, उन्होंने वहाँ वी/एसटीओएल में सीएफ़डी पर अनुसंधान किया।




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वर्ष 2003 में अंतरिक्ष की शोध के इसी प्रकार के 'नासा' के एक अनूठे मिशन का हिस्सा बनी थी भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री 'कल्पना चावला', जिसने दुनियाभर के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए छह अंतरिक्षयात्रियों के साथ 'कोलंबिया' अंतरिक्षयान में उड़ान भरी थी।

अपने कार्य को सफलतापूर्वक करने के बाद जब कल्पना धरती पर पुन: कदम रखने ही वाली थीं कि वायुमंडल में 'कोलंबिया'के टुकड़े-टुकड़े हो गए और धूल और धुएँ के गुबार के साथ कल्पना भी कहीं गुम हो गई।




हरियाणा के एक छोटे से कस्बे 'करनाल' की एक लड़की भविष्य में अंतरिक्ष में उड़ान भरेगी। इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी परंतु अपनी धुन की पक्की होनहार बालिका कल्पना ने अपने सपनों को सच कर दिखाया और आसमान को छू लिया।

1जुलाई 1962 को बनारसीलाल चावला के घर कल्पना ने आँखे खोली अपनी नन्ही आँखों से बड़े-बड़े सपने देखे। बचपन से ही कल्पना ने अपनी एक अलग राह चुनी और अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए कदम  बढ़ाए।सन् 1976 में करनाल के टैगोर स्कूल से कल्पना ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई पूरी की। उसके बाद 1982 में पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से वैमानिकी इंजीनियरिंग की डिग्री तथा 1984 में टैक्सास विश्वविद्यालय से वैमानिकी इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री हासिल की। 1988 में कल्पना ने अमेरिका के कोलारोडो विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट किया।


बचपन से ही ऊँची उड़ाने भरने के सपने देखने वाली कल्पना 1988 में 'नासा' से जुड़ी और अपने सपनों में हकीकत के रंग भरना शुरू कर दिया। यहाँ कल्पना ने फ्लुइड डायनामिक्स में महत्वपूर्ण अनुसंधान किया।

कल्पना की कर्मठता लगनशीलता को देखते हुए वर्ष 1994 में नासा ने कल्पना का चयन भावी अंतरिक्षयात्री के रूप में किया तथा 1995 में कल्पना को जॉनसन अंतरिक्ष केंद्र ने अंतरिक्षयात्रियों के 15 वें दल में शामिल किया गया।

नवंबर 1996 में कल्पना को एसटीएस- 87 में 'मिशन विशेषज्ञ' का पदभार सौंपने की घोषणा की गई। वर्ष भर बाद ही वर्ष 1997 में कल्पना ने अंतरिक्ष में चहलकदमी की,

सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बाद वर्ष 2003 में एसटीएस- 107 अभियान के तहत दूसरी बार पुन: करनाल की इस होनहार बेटी को अंतरिक्षयात्री के रूप में चुना गया तथा 'मिशन विशेषज्ञ' का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया।



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दुनिया में सभी लोगों को एक एक दिन इस खूबसूरत जहां को अलविदा कहना होता है, मगर दुनिया में कुछ लोग सिर्फ जीने के लिए आते हैं, मौत महज उनके शरीर को खत्म करती है. ऐसे ही जांबाजों में से एक भारत की बहादुर बेटी कल्पना चावला थीं. भले ही 1 फरवरी 2003 को कोलंबिया स्पेस शटल के दुर्घटनाग्रस्त होने के साथ कल्पना की उड़ान रुक गई लेकिन आज भी वह दुनिया के लिए एक मिसाल है.




1. कल्पना चावला की प्रारंभिक पढ़ाई करनाल के टैगोर स्कूल में हुई

2. 1988 में उन्होंने नासा के लिए काम करना शुरू किया.

3. उन्होंने अंतरिक्ष की प्रथम उड़ान एस टी एस 87 कोलंबिया शटल से संपन्न की. इसकी अवधि 19 नवंबर 1997 से 5 दिसंबर 1997 थी.

4. कल्पना जेआरडी टाटा (जो भारत के अग्रणी पायलट और उद्योगपति थे) उनसे प्रभावित और प्रेरित थीं.

5. 1995 में नासा ने अंतरिक्ष यात्रा के लिए कल्पना चावला का चयन किया.

6. कल्पना ने 1982 में चंडीगढ़ इंजीनियरिंग कॉलेज से एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री और 1984 से टेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की.

7. अंतरिक्ष की पहली यात्रा के दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 372 घंटे बिताए और पृथ्वी की 252 परिक्रमाएं पूरी की.

8. इस सफल मिशन के बाद कल्पना ने अंतरिक्ष के लिए दूसरी उड़ान कोलंबिया शटल 2003 से भरी.

9. 1 फरवरी 2002 को धरती पर वापस आने के क्रम में यह यान पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश करते ही टूटकर बिखर गया.

10. इस घटना में कल्पना के साथ छह अन्य अंतरिक्ष यात्रियों की भी मौत हो गई. कल्पना भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच हो मगर अंतरिक्ष में दिलचस्पी लेने वाली हर बेटी कल्पना चावला बनना चाहती है.





10 साल पहले अंतरिक्ष में जो हादसा हुआ वो अचानक नहीं था। इस हादसे की जानकारी नासा को थी। डिसकवरी यान के साथ जो कुछ हुआ वो भले ही नासा के इतिहास में एक काला अध्याय हो लेकिन अब जो खुलासा हुआ है वो उससे भी भयानक और शर्मिदा कर देने वाला है।

अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की पहली महिला अंतरिक्ष का खिताब जीतने वाली कल्पना की मौत उसके सफर के साथ ही तय हो गई


जिस दिन कल्पना चावला ने अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी, उसी दिन तय हो गई थी उनकी मौत. सिर्फ कल्पना ही नहीं, उनके साथ गए 7 यात्रियों के अंत का अलार्म भी डिस्कवरी की उड़ान के साथ बज चुका था. 16 दिन ये लोग मौत के साये में रहे. नासा सब जानता था लेकिन उसने किसी को को कुछ नहीं बताया.

ये सच है, कोलंबिया स्पेस शटल के उड़ान भरते ही पता चल गया था कि ये सुरक्षित जमीन पर नहीं उतरेगा, तय हो गया था कि सातों अंतरिक्ष यात्री मौत के मुंह में ही समाएंगे. फिर भी उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई. बात हैरान करने वाली है, लेकिन यही सच है, इसका खुलासा मिशन कोलंबिया के प्रोग्राम मैनेजर ने किया है.


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अंतरिक्ष यात्रा के 16 दिन तक हर पल मौते के साये में स्पेस वॉक करती रहीं कल्पनाचावला और उनके 6 साथी. उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगने दी गई कि वो सुरक्षित धरती पर नहीं सकते. वो जी जान से अपने मिशन में लगे रहे, वो पल-पल की जानकारी नासा को भेंजते रहे लेकिन बदले में नासा ने उन्हें इल्म तक नहीं होने दिया कि वो धरती को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर जा चुके हैं, उनके शरीर के टुकड़ों को ही लौटना है.

नासा के वैज्ञानिक दल नहीं चाहते थे कि मिशन पर गये अंतरिक्ष यात्री घुटघुट अपनी जिंदगी के आखिरी लम्हों को जिएं. उन्होंने बेहतर यही समझा कि हादसे का शिकार होने से पहले तक वो मस्त रहे. मौत तो वैसे भी आनी ही थी.

वेन हेल के मुताबिक, अगर अंतरिक्ष यात्रिय़ों को जानकारी होती तो भी वो कुछ नहीं कर सकते थे. हद से हद ऑक्सीजन रहने तक वो अंतरिक्ष का चक्कर ही लगा सकते थे, ऑक्सीजन खत्म होने पर वैसे भी उनकी जान चली ही जाती. ये खुलासा इतना सनसनीखेज है कि कई लोग इस पर यकीन करने को तैयार नहीं. कोलंबिया स्पेस शटल की फ्लाइट इंजीनियर कल्पना चावला के पिता ने भी इसे खारिज कर दिया है.

इस पूरे मामले पर नासा ने फिलहाल चुप्पी साध रखी है. उसने तब के प्रोग्राम मैने वेन हेल की बातों का ना तो खंडन किया है और ना ही उसे सच करार दिया है. ये चुप्पी कई सवालों को जन्म देती है.



































































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Kalpana Chawla was an Indian-American astronaut and the first Indian woman in space


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