शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

एनी बेसेंट (Annie Besant) : जीवनी,जीवन परिचय,उपलब्धियाँ,उद्धरण,प्रसिद्ध ग्रंथ,रचना,thoughts |


एनी बेसेंट की जीवनी तथा जीवन परिचय |
प्रख्यात समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट ने भारत को एक सभ्यता के रूप में स्वीकार किया था तथा भारतीय राष्ट्रवाद को अंगीकार किया था। अग्रणी आध्यात्मिक, थियोसोफिस्ट, महिला अधिकारों की समर्थक, लेखक, वक्ता एनी बेसेंट : विदेशी मिट्टी और भारतीय मन (सादर इंडिया); भारतवासियों का स्वाभिमान जगाने वाली एनी बेसेंट |






 
एनी बेसेंट (Annie Besant) : जीवनी,उपलब्धियाँ,उद्धरण,प्रसिद्ध ग्रंथ,रचना,|
नाम   – एनी फ्रैंक बेसेन्ट.

जन्म        – 1 अक्तुबर, 1847.

जन्मस्थान  – लंडन (इंग्लंड).

पिता        – विलियम पेजवुड.

माता        – एमिली.

शिक्षा      – एनी बेसेन्ट की शिक्षा इंग्लंड और जर्मनी मे हुयी. अंग्रेजी, जर्मनी और फ्रेंच भाषा पर प्रभुत्व.

विवाह     – फ्रैंक बेसेन्ट के साथ (1867 में)

मृत्यु  – 20 सितंबर 1933 को

ग्रंथ इंडियन आइडियल्स, इंडिया नेशन, हाउस इंडिया ब्राँट हर फ्रीडम इन डिफेन्स ऑफ हिंदुइझम etc.

विशेषता  –

1) एनी बेसेन्ट ने भगवद्गीता का अंग्रेजी अनुवाद किया.

2) राष्ट्रीय कॉग्रेंस की पहीली महीला अध्यक्ष.


एनी बेसेंट : जीवनी,जीवन परिचय,उपलब्धियाँ,उद्धरण |




डॉ॰ एनी बेसेन्ट का जन्म लन्दन शहर में 1847 में हुआ। इनके पिता अंग्रेज थे। पिता पेशे से डाक्टर थे। पिता की डाक्टरी पेशे से अलग गणित एवं दर्शन में गहरी रूचि थी। इनकी माता एक आदर्श आयरिस महिला थीं। डॉ॰ बेसेन्ट के ऊपर इनके माता पिता के धार्मिक विचारों का गहरा प्रभाव था।

अपने पिता की मृत्यु के समय डॉ॰ बेसेन्ट मात्र पाँच वर्ष की थी। पिता की मृत्यु के बाद धनाभाव के कारण इनकी माता इन्हें हैरो ले गई। वहाँ मिस मेरियट के संरक्षण में इन्होंने शिक्षा प्राप्त की। मिस मेरियट इन्हें अल्पायु में ही फ्रांस तथा जर्मनी ले गई तथा उन देशों की भाषा सीखीं। १७ वर्ष की आयु में अपनी माँ के पास वापस गईं।

युवावस्था में इनका परिचय एक युवा पादरी से हुआ और 1867 में उसी रेवरेण्ड फ्रैंक से एनी बुड का विवाह भी हो गया।

पति के विचारों से असमानता के कारण दाम्पत्य जीवन सुखमय नहीं रहा। संकुचित विचारों वाला पति असाधारण व्यक्तित्व सम्पन्न स्वतंत्र विचारों वाली आत्म-विश्वासी महिला को साथ नहीं रख सके। 1870 तक वे दो बच्चों की माँ बन चुकी थीं। ईश्वर, बाइबिल और ईसाई धर्म पर से उनकी आस्था डिग गई।

पादरी-पति और पत्नी का परस्पर निर्वाह कठिन हो गया और अन्त में १८74 में सम्बन्ध-विच्छेद हो गया।। तलाक के पश्चात् एनी बेसेन्ट को गम्भीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा और उन्हें स्वतंत्र विचार सम्बन्धी लेख लिखकर धनोपार्जन करना पड़ा।


डॉ॰ बेसेन्ट इसी समय चार्ल्स व्रेडला के सम्पर्क में आई। अब वह सन्देहवादी के स्थान पर ईश्वरवादी हो गई। कानून की सहायता से उनके पति दोनों बच्चों को प्राप्त करने में सफल हो गये। इस घटना से उन्हें हार्दिक कष्ट हुआ।







एनी बेसेंट 1889 में थियोसोफी के विचारों से प्रभावित हुई। वह 21 मई, 1889 को थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ गईं। शीघ्र ही उन्होंने थियोसोफिकल सोसायटी की वक्ता के रूप में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

उनका 1893 में भारत आगमन हुआ। वर्ष 1907 में वह थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। उन्होंने पाश्चात्य भौतिकवादी सभ्यता की कड़ी आलोचना करते हुए प्राचीन हिंदू सभ्यता को श्रेष्ठ सिद्ध किया। धर्म में उनकी गहरी दिलचस्पी थी।

उस काल में बाल गंगाधर तिलक के अलावा उन्होंने भी गीता का अनुवाद किया। वह भूत-प्रेत जैसी रहस्यमयी चीजों में भी विश्वास करती थीं।

वह 1913 से लेकर 1919 तक भारत के राजनीतिक जीवन की अग्रणी विभूतियों में एक थीं।  

कांग्रेस ने उन्हें काफी महत्व दिया और उन्हें अपने एक अधिवेशन की अध्यक्ष भी निर्वाचित किया। उन्होंने बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर होमरूल लीग (स्वराज संघ) की स्थापना की और स्वराज के आदर्श को लोकप्रिय बनाने में जुट गई। हालांकि बाद में तिलक से उनका विवाद हो गया।

जब गांधीजी ने सत्याग्रह आंदोलन प्रारंभ किया तो वह भारतीय राजनीति की मुख्यधारा से अलग हो गईं।एनी बेसेंट ने निर्धनों की सेवा में आदर्श समाजवाद देखा। वह विधवा विवाह एवं अंतर-जातीय विवाह के पक्ष में थीं, लेकिन बहुविवाह को नारी गौरव का अपमान एवं समाज के लिए अभिशाप मानती थीं।


प्रख्यात समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी एनी बेसेंट ने भारत को एक सभ्यता के रूप में स्वीकार किया था तथा भारतीय राष्ट्रवाद को अंगीकार किया था।

भले ही वह विदेशी महिला थीं लेकिन उन्होंने भारत को एक सभ्यता के रूप में स्वीकार किया और यहां राष्ट्रवाद को गले से लगाया। दरअसल वह सभ्यता और राष्ट्रीयता को सहचर मानती थीं। एनी बेसेंट ने सभ्यता के उन तत्वों की व्याख्या प्रस्तुत की जो अव्याख्यायित थे। उन्होंने अपने होमरूल आंदोलन से लोगों में चेतना का संचार किया।

गत शताब्दी में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध ग्रंथ निम्नलिखित हैं :

  1. डेथ-ऐण्ड आफ्टर (थियोसॉफिकल मैन्युअल III) - १८९३
  2. आत्मकथा - १८९३
  3. इन द आउटर कोर्ट - १८९५
  4. कर्म (थियोसॉफिकल मैन्युअल IV) - १८९५ - कर्म-व्यवस्था का सुन्दर चित्रण।
  5. द सेल्फ ऐण्ड इट्स शीथ्स - १८९५
  6. मैन ऐण्ड हिज बौडीज (थियोसॉफिकल मैन्युअल VII) - १८९६
  7. द पाथ ऑफ डिसाइपिल्शिप - १८९६ - मुमुक्ष का मार्ग।
  8. द ऐंश्यिएण्ट विज्डम - १८९७
  9. फोर ग्रेट रेलिजन्स - १८९७ - धर्म पर प्रसिद्ध पुस्तक - कालान्तर में चार भागों में प्रकाशित - हिन्दूइज्म, जोरैस्ट्रियनिज्म, बुद्धिज्म, क्रिश्चियैनिटी।
  10. एवोल्यूशन ऑफ लाइफ एण्ड फॉर्म - १८९९

श्रीमती एनी बेसेन्ट द्वारा बीसवीं शताब्दी में कोरी गयी रचनाओं में निम्नलिखित सुप्रसिद्ध हैं-

  • ११. सम प्रॉब्लम्स ऑफ लाइफ - १९००
  • १२. थॉट पावर : इट्स कण्ट्रोल ऐण्ड कल्चर - १९०१
  • १३. रेलिजस प्रॉब्लम् इन इण्डिया - १९०२ - यह उनकी एक महान साहित्यिक कृति थी जो कालान्तर में चार भागों - इस्लाम, जैनिज्म, सिक्खिज्म, थियोसॉफी - में प्रकाशित हुई।
  • १३. रेलिजस प्रॉब्लम् इन इण्डिया - १९०२ - यह उनकी एक महान साहित्यिक कृति थी जो कालान्तर में चार भागों - इस्लाम, जैनिज्म, सिक्खिज्म, थियोसॉफी - में प्रकाशित हुई।
  • १४. द पेडिग्री ऑफ मैन - १९०४
  • १५. ए स्टडी इन कौंसेस्नेस - १९०४
  • १६. ए स्टडी इन कर्मा - १९१२ - कर्म-सिद्धान्त पर प्रणीत।
  • १७. वेक अप, इण्डिया : ए प्ली फॉर सोशल रिफॉर्म - १९१३
  • १८. इण्डिया ऐण्ड ए एम्पायर - १९१४
  • १९. फॉर इण्डियाज अपलिफ्ट - १९१४
  • २०. द कॉमनवील - १९१४ की जुलाई से निकालना शुरू किया (प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्र)
  • २१. न्यू इण्डिया - १९१५ - मद्रास (चेन्नई) से निकलने वाला दैनिक पत्र।
  • २२. हाऊ इण्डिया रौट् फॉर फ्रीडम - १९१५ - यह प्रसिद्ध ग्रंथ आफिशियल रिकार्डों के आधार पर रचित राष्ट्रीय कांग्रेस की कहानी है।
  • २३. इण्डिया : ए नेशन - १९१५ - द पीपुल्स बुक्स सिरीज की इस पुस्तक को १९१६ में अंग्रेज सरकार ने जब्त कर लिया और एनी बेसेन्ट को अलगे वर्ष नजरबन्द कर दिया गया।
  • २४. कांग्रेस स्पीचेज - १९१७
  • २५. द बर्थ ऑफ न्यू इण्डिया - १९१७ - यह पुस्तक फॉर इण्डियाज अपलिफ्ट - १९१४, से मिलती जुलती है।
  • २६. लेटर्स टू ए यंग इण्डियन प्रिन्स - १९२१ - इस ग्रंथ में छोटे-छोटे देशी राज्यों को आधुनिक तरीकों से पुनर्गणित करने की संस्तुति की गयी है।
  • २७. द फ्यूचर ऑफ इण्डियन पॉलिटक्स - १९२२ - इसकी उपादेयता तत्कालीन समस्याओं को समझने के लिए रही है।
  • २८. ब्रह्म विद्या - १९२३
  • २९. इण्डियन आर्ट - १९२५ - भारतीय संस्कृति पर यह पुस्तक कलकत्ता विश्वविद्यालय में दिये गये कमला लेक्चर पर आधारित है।
  • ३०. इण्डिया : बौण्ड ऑर फ्री? - १९२६ - यह पुस्तक अद्भुत साहित्यिक और माननीय रुचि का एक निजी दस्तावेज है। साथ ही साथ भारतीय इतिहास की एक अपूर्व निधि है। इसमें भारत के भूत, वर्तमान और भविष्य का व्यवस्थित सर्वेक्षण किया गया है।


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