गुरुवार, 4 सितंबर 2014

Kathayen Jo Gyan De.

एक बार की बात है की एक बहुत

बड़ा उद्धयोगपति व्यापार करने के लिए

विदेशों में जाता था| उसके पास एक बहुत

बड़ा पानी का जहाज़ था जिसमें वह

अपना माल लादकर विदेश ले

जाया करता था|

एक बार किसी देश की यात्रा के दौरान

ही उसका जहाज़ का इंज़न खराब हो गया|

जहाज़ में कई मैकेनिक थे वे सभी इंज़न

की मररमत में लग गये| बहुत समय बीत

गया लेकिन जहाज़ स्टार्ट नहीं हुआ| अब

सारे मैकेनिक थक कर हार मान चुके थे|

तभी वहाँ से एक बूढ़ा व्यक्ति गुज़रा जो पहले

कभी जवानी में जहाज़ों की रेपरिंग

करता था| व्यापारी ने उससे जहाज़

को ठीक करने की विनती की | बूढ़े

व्यक्ति ने अपने कंधे पे एक

बड़ा सा झोला लटकाया हुआ था जिसमें उसके

औजार थे| अब उसने झोले से एक

हथौड़ा निकाला और जहाज़ के पास आया|

वह घंटों इंज़न को उपर नीचे देखता और

जाँचता रहा लेकिन किया कुछ नहीं| सारे

लोग उसे मूर्ख समझने लगे कि कितनी देर

हो गयी और ये मुर्ख बस इंज़न को देखे

जा रहा है| बहुत देर बाद बूढ़े को कुछ समझ में

आया और उसने इंज़न के एक पुर्ज़े पर हल्के से

हथौड़ा मारा और इंज़न स्टार्ट हो गया|

सारे लोग खुशी खुशी वहाँ से चल दिए|

एक सप्ताह बाद व्यापारी को 10,000

रुपये का बूढ़े व्यक्ति की तरफ से एक बिल

मिला| व्यापारी बिल देखकर बहुत

गुस्सा हुआ और बोला बूढ़े ने ज़्यादा कुछ

किया भी नहीं था और इतना बड़ा बिल

बना के भेज दिया|

व्यापारी ने बूढ़े को संदेश भेजा की मुझे काम

के अनुसार ये बिल समझाओ|

बूढ़े व्यक्ति ने बिल भेजा जिसमें लिखा था:-

इंज़न पे चोट मारने के – 2 रु

सही जगह पहचानने के – 9998 रु

तो मित्रों यही बात हमारे जीवन पर

भी लागू होती है, कोई कम करना तभी सफल

है जब वह सही ढंग से सही जगह किया जाए|

हममें से बहुत सारे लोग रोज बिना कुछ सोचे

समझे बस भाग दौड़ भरी जिंदगी में लगे रहते

हैं| लेकिन सही अवसर ,सही समय

या सही दिशा नहीं पहचान पाते हैं| कार्य

तो कोई भी कर सकता है लेकिन सही ढंग से

किया हुआ कार्य ही सफल होता है|

1 comments:

आशीष भाई ने कहा…

बढ़िया कथा , धन्यवाद !
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