गुरुवार, 4 सितंबर 2014

रेगिस्तान में दो मित्र

दो मित्र रेगिस्तान में यात्रा कर रहे थे।

सफर में किसी मुकाम पर उनका किसी बात

पर वाद-विवाद हो गया। बात इतनी बढ़

गई कि एक मित्र ने दूसरे मित्र को थप्पड़

मार दिया। थप्पड़ खाने वाले मित्र

को इससे बहुत बुरा लगा लेकिन बिना कुछ कहे

उसने रेत में लिखा – "आज मेरे सबसे अच्छे

मित्र ने मुझे थप्पड़ मारा"।

वे चलते रहे और एक नखलिस्तान में आ पहुंचे

जहाँ उनहोंने नहाने का सोचा। जिस

व्यक्ति ने थप्पड़ खाया था वह रेतीले दलदल

में फंस गया और उसमें समाने लगा लेकिन उसके

मित्र ने उसे बचा लिया। जब वह दलदल से

सही-सलामत बाहर आ गया तब उसने एक

पत्थर पर लिखा – "आज मेरे सबसे अच्छे

मित्र ने मेरी जान बचाई"।

उसे थप्पड़ मारने और बाद में बचाने वाले

मित्र ने उससे पूछा – "जब मैंने तुम्हें

मारा तब तुमने रेत पर लिखा और जब मैंने

तुम्हें बचाया तब तुमने पत्थर पर लिखा,

ऐसा क्यों?"

उसके मित्र ने कहा – "जब हमें कोई दुःख दे

तब हमें उसे रेत पर लिख देना चाहिए

ताकि क्षमाभावना की हवाएं आकर उसे

मिटा दें। लेकिन जब कोई हमारा कुछ

भला करे तब हमें उसे पत्थर पर लिख

देना चाहिए ताकि वह हमेशा के लिए

लिखा रह जाए।

3 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

सुन्दर प्रस्तुति।
शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (06-09-2014) को "एक दिन शिक्षक होने का अहसास" (चर्चा मंच 1728) पर भी होगी।
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सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को नमन करते हुए,
चर्चा मंच के सभी पाठकों को शिक्षक दिवस की
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

सु..मन(Suman Kapoor) ने कहा…

बहुत बढ़िया

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