रविवार, 14 सितंबर 2014

नानी की शिक्षाप्रद कहानियाँ

एक गावं में रामू नाम का एक किसान

रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और

भोला-भाला था। यह

सदा ही दूसरों की सहायता करने के लिए

तैयार रहता था।

एक बार की बात है कि शाम के समय वह

दिशा मैदान (शौच) के लिए खेत की ओर

गया। उसके बाद वह ज्योंही घर की ओर

चला उसके पैर में एक अरहर की खूंटी (अरहर

काटने के बाद खेत में बचा हुआ अरहर के डंठल

का थोडा बाहर निकला हुआ जड सहित

भाग) गड़ गई। उसने

सोचा कि यह किसी और के पैर में गड़े इससे

अच्छा है कि इसे उखाड़ दूं। उसने जोर लगाकर

खूंटी को उखाड़ दिया।

खूंटी के नीचे उसे कुछ सोने

की अशरफियां दिखाई दीं। उसने

सोचा कि ये अशर्फियां मेरे लिए हैं तो राम

ने दिखाया, वही घर भी पहुंचाएगा। इसके

बाद घर आकर उसने यह बात अपने

पत्नि को बताई। रामू की पत्नि उससे

भी भोली थी, उसके पेट में यह बात

नहीं पची और उसने जाकर

पड़ोसी को बता दी।

पड़ोसी बड़ा ही घाघ था। रात को जब

सभी लोग सो गए तो उसने अपने

घरवालों को जगाया और कहा– चलो , हम

लोग अशर्फियां खोद लाते हैं।

वे सभी कुदाल आदि लेकर खेत में पहुंच गए।

उन्होंने बताई हुई जगह पर खोदा। सभी के

चेहरे खुशी से खिल गए क्योंकि वहां एक

नहीं पांच-पांच बटुलियां (धातु का एक

पात्र) थीं। पर पडोंसी ने ज्योंही उन्हें

खोला सभी में अशर्फियां नहीं अपितु बडे-बडे

पहाडी बिच्छु थे।

पडोसी ने कहा-रामू ने हम लोगों को मारने

की योजना बनाई थी। हमें इसका जवाब

देना ही होगा। उसने अपने घरवालों से

कहा– पांचों बटुलियों को उठाकर ले

चलो और रामू का छप्पर फाडकर इन बिच्छुओं

को उसके घर में

गिरा दो ताकि इन बिच्छुओं के काटने से

पति- पत्नि दोनों की इहलीला समप्त

हो जाए।

घरवालों ने वैसा ही किया वे रामू का छप्पर

फाडकर बिच्छुओं को उसके घर में गिराने लगे।

लेकिन धन्य है ऊपरवाला और उसकी लीला।

जैसे-जैसे बिच्छु रामू के घर में गिरते

अशर्फी बनते

जाते। सुबह जब रामू

उठा तो अशर्फियों को देख पहले भगवान

को धन्यवाद दिया और अपनी पत्नि से

कहा-देखा, "देनेवाला जब भी देता,

देता छप्पर फाड़ कर देता है"

शिक्षा :- भोले का साथी भगवान होता है॥

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