मंगलवार, 12 अगस्त 2014

Kathayen - Jo Gyan De.

वर्धमान महावीर के शिष्यों में चर्चा में

चल रही थी कि मनुष्य के अधःपतन

का क्या कारण है? किसी ने

कामवासना बताया तो किसी ने लोभ,

तो किसी ने अहंकार। आखिर वे शंका-

समाधान करने के लिए महावीर के पास

आए। महावीर ने शिष्यों से पूछा- "पहले

यह बताओ कि मेरे पास एक

अच्छा बढ़िया कमण्डलु है जिसमें पर्याप्त

मात्रा में जल समा सकता है। यदि उसे

नदी में छोड़ा जाए, तो क्या वह डूबेगा?"

"कदापि नहीं।" शिष्यों ने एक स्वर से

जवाब दिया।

महावीर ने पूछ- "और यदि उसमें एक

छिद्र हो जावे तो?"

शिष्य- "तब तो डूबेगा ही।"

महावीर- "यदि दायीं ओर हो तो?"

शिष्य- "दायीं ओर हो या बायीं ओर!

छिद्र कहीं भी हो, पानी उसमें प्रवेश

करेगा ही और वह डूब जाएगा।"

महावीर बोले- "तो बस जान

लो कि मानव जीवन भी उस कमंडलु के

समान ही है। काम, क्रोध, लोभ, मोह,

अहंकार, मत्सर आदि सभी दुर्गुण उसे

डुबाने के निमित्त कारण हो सकते हैं-

किसी में कोई भेदभाव नहीं, प्रत्येक

अपना-अपना असर करता है। इसलिए हमें

सजग रहना चाहिए कि कहीं हमारे जीवन

रूपी कमंडलु में कोई छिद्र

तो नहीं हो रहा है।"

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