बुधवार, 6 अगस्त 2014

Gyan ki bate

चिंतन उसे कहते हैं जिसमें कि भूतकाल के लिये

विचार किया जाता है। भूतकाल हमारा किस

तरीके से व्यतीत हुआ, इसके बारे में

समीक्षा करिये। अपनी समीक्षा नहीं कर पाते

आप। दूसरों की समीक्षा करना जानते हैं।

पड़ोसी की समीक्षा कर सकते हैं, बीबी के दोष

निकाल सकते हैं, बच्चों की नुक्ताचीनी कर सकते

हैं, सारी दुनिया की गलती बता सकते हैं, भगवान्

की गलती बता देंगे और हरेक की गलती बता देंगे।

कोई भी ऐसा बचा हुआ नहीं है, जिसकी आप

गलती बताते न हों। लेकिन अपनी गलती;

अपनी गलती का आप विचार ही नहीं करते।

अपनी गलतियों का हम विचार करना शुरू करें

और अपनी चाल की समीक्षा लेना शुरू करें और

अपने आपका हम पर्यवेक्षण शुरू करें

तो ढेरों की ढेरों चीजें ऐसी हमको मालूम पडेंगी,

जो हम को नहीं करनी चाहिए थी और

ढेरों की ढेरों ऐसी चीजें मालूम पडेंगी आपको,

जो इस समय हमने जिन कामों को, जिन

बातों को अपनाया हुआ है,

उनको नहीं अपनाना चाहिए था।

मन की बनावट कुछ ऐसी विलक्षण है,

अपना सो अच्छा, अपना सो अच्छा, बस।

यही बात बनी रहती है। अपना स्वभाव

भी अच्छा, अपना आदतें भी अच्छी, अपना विचार

भी अच्छा, अपना चिंतन भी अच्छा, सब

अपना अच्छा, बाहर वालों का गलत।

आध्यात्मिक उन्नति में इसके बराबर अड़चन डालने

वाला और दूसरा कोई व्यवधान है ही नहीं।

इसीलिये आप पहला काम वहाँ से शुरू कीजिए

कि आत्म समीक्षा।

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