बुधवार, 30 जुलाई 2014

Moral Story

दो मित्र थे| वे बड़े ही बहादुर थे| उनमें से एक ने

अपने बादशाह के अन्याय के विरुद्ध आवाज

उठाई| बादशाह बड़ा ही कठोर और बेरहम था|

उसको जब मालूम हुआ तो उसने उस नौजवान

को फांसी के तख्ते पर लटका देने की आज्ञा दी|

नौजवान ने बादशाह से कहा - "आप जो कर रहे हैं

वह ठीक हैं| मैं खुशी-खुशी मौत की गोद में

चला जाऊंगा, लेकिन आप मुझे थोड़ी मोहलत दे

दीजिए, जिससे मैं गांव जाकर अपने बच्चों से मिल

आऊं|"

बादशाह ने कहा - "नहीं, मुझे तुम पर विश्वास

नहीं है|"

उस नौजवान का मित्र वहां मौजूद था| वह आगे

बढ़कर बोला - "मैं अपने इस दोस्त की जमानत

देता हूं, अगर यह लौटकर न आए तो आप मुझे

फांसी पर चढ़वा दीजिए|"

बादशाह चकित रह गया| उसने अब तक ऐसा कोई

आदमी नहीं देखा था, जो दूसरों के लिए

अपनी जान देने को तैयार हो जाए|"

बादशाह ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली|

उसे छ: घण्टे का समय दिया गया| नौजवान घोड़े

पर सवार होकर अपने गांव को रवाना हो गया|

उसका मित्र जेलखाने भेज दिया गया|

नौजवान ने हिसाब लगाकर देखा कि वह पांच

घण्टे में लौट आएगा, लेकिन बच्चों से मिलकर जब

वह वापस आ रहा था, उसका घोड़ा ठोकर खाकर

गिर गया और फिर उठा ही नहीं| नौजवान के

भी चोट आई, पर उसने हिम्मत नहीं हारी|

छ: घण्टे बीते और वह नौजवान

नहीं लोटा तो उसका मित्र बड़ा खुश हुआ| आखिर

इससे बढ़कर क्या बात होती कि मित्र-मित्र के

काम आए| वह भगवान से प्रार्थना करने

लगा कि उसका मित्र न लौटे| जिस समय मित्र

को फांसी के तख्ते के पास ले

जाया जा रहा था कि नौजवान वहां पहुंच गया|

उसने मित्र से कहा - "लो मैं आ गया| अब तुम घर

जाओ| मुझे विदा दो|"

मित्र बोला - "यह नहीं हो सकता|

तुम्हारी मियाद पूरी हो गई|"

नौजवान ने कहा - "यह तुम क्या कहते हो!

सजा तो मुझे मिली है|"

दोनों मित्रों की दोस्ती को बादशाह देख

रहा था| उसकी आंखें डबडबा आईं| उसने उन

दोनों को बुलाकर कहा - "तुम्हारी दोस्ती ने

मेरे दिल पर गहरा असर डाला है| जाओ, मैं तुम्हें

माफ करता हूं|"

उस दिन से बादशाह ने कभी किसी पर जुल्म

नहीं किया|

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