रविवार, 8 जून 2014

कुंभ मेला ( महा कुंभ मेला )

 KUMBH MELA


  • कुंभ मेला KUMBH MELA ) हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला मेला है जिसमें कई तादार में हिंदू एक पवित्र नदी पर इकठे होते हैं और उस नदी में स्नान करते हैं.

  • कुंभ मेला " महा कुंभ मेला " के नाम से भी जाना जाता है.

  • “ कुंभ " का मतलब मटकी जार या गमला होता है और " मेला " का मतलब इकठे   होना या मिलना बड़ी तादार में.

                                                        इतिहास ( HISTORY)

  • ये कहा जाता है की एक समय में दुरवासा मुनि के श्राप से देवताओं ने अपनी शक्ति खो दी थी.

  • अपनी शक्ति को दोबारा पाने के लिए वह भगवान ब्रह्मा और शिव की शरण में गये.

  • उन्होने ने सभी देवताओं को भगवान विष्णु के पास भेज दिया.

  • भगवान विष्णु ने देवताओं को एक दूध के समुद्र जिसका नाम " शीर सागर " था का मंथन करने के लिए कहा.

  • और उस मंथन से निकलने वाले अमृत का सेवन करने के लिए कहा.

  • यह काम देवता लोग अकेले नहीं कर सकते थे.

  • उन्हे असूरों के साथ मिलकर ही ये करना था और इसके लिए उन्हे असूरों के साथ ये वादा करना पड़ा की मंथन से निकलने वाली चीज़ों को को वो बराबर बाँटेंगे.

  • लेकिन जैसे ही कुंभ भरा अमृत निकला तो देवताओं और असूरों में लड़ाई छिड़ गयी जो १२ दिनों ( इंसानी १२ साल ) ( HUMAN 12 YEARS ) तक लगातार चलती रही.

  • इस लड़ाई के दौरान भगवान विष्णु एक औरत मोहिनी मूर्ति के वेश में आए और उस कुंभ को धोखे से ले कर भाग गये.

  • जाते समय उस कुंभ से अमृत की कुछ बूँदें धरती पर गिर गयी .

  • अमृत की ये बूँदें चार स्थानों पर गिरी जिनके नाम हैं --  अल्लाहाबाद ( ALLAHABAB , PRAYAG )  उज्जैन ( UJJAIN ) हरिद्वार ( HARIDWAR ) और नासिक
            ( NASHIK ).

                                       ग्रहों से संबंध ( PLANETS )

  • कुंभ मेला अलग अलग जगह पर मनाना निर्भर करता है,  ब्रहस्पति ( JUPITER )और सूरज  ( SUN ) की स्थिति पर.

  • जब दोनो ग्रह सिंह ( LEO ) राशि ( SUN SIGN ) में है, तो मेला नासिक में मनाया जाता है.

  • अगर सूरज मेश ( ARIES ) राशि में है तो मेला हरिद्वार में होगा.

  • जब ब्रहस्पति वृषब ( TAURAS )  राशी में होता है और सूरज मकर ( CAPRICORN ) राशि होता है, तो मेला प्रयाग में मनाया जाता है.

  • और जब दोनो ग्रह वृश्चिक ( SCORPIO ) राशि में होता हैं, तो मेला उज्जैन में मनाया जाता है.


                                         रीति रिवाज़

  • जैसे ऊपर बताया गया है कुंभ मेला चार जगह पर मनाया जाता है 

अल्लाहाबाद ( प्रयाग ) (ALLAHABAD, PRAYAG )
हरिद्वार ( HARIDWAR )
उज्जैन ( UJJAIN )
नासिक ( NASHIK )

  • यह मेला तीन सालों बाद बारी बारी ( ON ROTATION BASIS ) से इन चारों स्थानों पर लगता है.

  • इसलिए एक स्थान पर ये मेला १२ सालों 12 YEARS ) के बाद आता है.

  • अर्ध कुंभ मेला :  यह मेला ६ सालों के बाद दो स्थाओं पर ही लगता है -- अल्लाहाबाद और हरिद्वार.

  • पूर्ण कुंभ मेला -- ये मेला केवल प्रयाग में ही होता है हर १२ साल के बाद

  • महा कुंभ मेला -- ये मेला केवल प्रयाग में ही होता है १४४ सालों बाद


  • ईन चारों स्थानों पर जो पवित्र नदियाँ बहती हैं वो इस प्रकार हैं.

हरिद्वार -- गंगा
अल्लाहाबाद -- गंगा और यमुना का संगम
उज्जैन -- शिप्रा
नासिक --  गोदावरी




  • ईस मेले में कई लोग ऐसे दिखेंगे जिन्होने पौराणिक रिवाज़ों के अनुसार सिर्फ़ एक ऑरेंज रंग के कपड़ा ही पहना होगा ( चाहे जितनी भी सर्दी क्यूँ ना हो ) और अपने माथे पर और शरीर पर राख माला हुआ होगा. इन्हें " नागा सन्यासी " ( NAG SANYASI )  कहते हैं.

  • इस मेले की महानता है की इस मेले में लाखों की तादार में लोग पवित्र नदी में स्नान करते है .

  • ये कहा जाता है की ऐसा करने से सब पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.

                                 आने वाला कुंभ मेला

  • २०१३ ( 2013 ) में महा कुंभ मेला १४  जनवरी ( 14 JANUARY ) से प्रयाग में शुरू होगा ,जिसमें १०० मिलियन ( 100 MILLION ) लोगों के आने की उमीद है.

  • अगला कुंभ मेला उज्जैन में होगा . उज्जैन में होने वेल मेले को “ सिंहस्थ “ (SIMHASTHA )भी कहते हैं.





प्रश्न: कुम्भ का मेला 2013 में कब आयोजित होगा?


जनवरी

फरवरी

मार्च

अप्रैल

सही उत्तर: जनवरी  


प्रश्न: कुम्भ के मेले में किस किस नदी पर स्नान किया जाता है?

गंगा

यमुना

गोदावरी 

तीस्ता

सही उत्तर: गंगा, गोदावरी  

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